Monday, October 3, 2022
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चुनाव और महिलाएं

भारत –  विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र। जहां हर व्यक्ति को अपना मत  देकर सरकार चुनने का मौका मिलता है। इस वर्ष देश “आज़ादी का अमृत महोत्सव” बना रहा है। 75 साल में सरकारें बदलती रहीं और देश बढ़ता गया। पर राजनैतिक दृष्टि से देश का एक अहम वर्ग उतना सशक्त नहीं हो पाया जितना की उसे होना चाहिए था। यह वर्ग है महिलाएं। महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मेहनत और जज़्बे से विश्व में कमाल करती नजर आ रही है। चाहें वो खेल में मीराबाई चानू या पीवी सिंधु हों या मिस यूनिवर्स हरनाज़ संधू , भारतीय महिलाओं ने भारत का नाम गर्वित किया है।लेकिन राजनैतिक तौर पर आज भी भारत की नारी पीछे है।

संसद में ⅓ सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने का बिल अभी भी लंबित  है और तो और राजनीति में महिलाओं के योगदान के लिए भारत नीचे से  20वें स्थान पर आता है। इंदिरा गांधी, प्रतिभा पाटिल, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, सुष्मा स्वराज, स्मृति ईरानी, शीला दीक्षित भारत की कुछ ऐसी राजनेत्री है जिन्होने देश की राजनीति में महिलाओं का नेतृत्व किया। इन्होंने दिखा दिया की महिलाएं चाहे तो देश की राष्ट्रपति भी बन सकती हैं और प्रधानमंत्री भी। लेकिन यह  कुछ गिनी चुनी महिलाएं हैं,  जिन्होंने देश राजनीति में एक अहम स्थान पाया है।  लेकिन महिला वोटरों की तो आज भी नारी अपने मत और अपनी इच्छा से वोट नहीं दे पाती। गांव और छोटे शहरों में यह आंकड़ा ज्यादा है क्योंकि यह पितृसत्तात्मक समाज उन्हें इस चीज की इजाजत नहीं देता। महिलाएं अक्सर अपने पति, प्रधान या घर के पुरुष सदस्यों के कहने पर वोट देती है। पर शुकर तो इस बात का है की वह वोट तो देती है, कुछ महिलाओं को प्रताड़ित कर उनके संवैधानिक अधिकार को भी छीन लिया जाता है।

भारत एक ऐसा देश बन चुका है जहां महिला सुरक्षा का मामला सिर्फ राजनेताओं के भाषण में रह जाता है। दिन-ब-दिन बलात्कार के मामले बढ़ते जा रहे हैं। छोटी-छोटी बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक शर्मसार करने वाली खबरें रोज सुनाई दे जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिलाओं की स्थिति इस देश में कैसी हो गई है। इस स्थिति की जिम्मेदारी  सिर्फ राजनेताओं की नहीं, समाज बल्कि समाज की भी है हमें समाज के तौर पर फेल हुए हैं। महिलाओं को अपने मत के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्हें देश कल्याण में उतना ही या उस से बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए जितना पुरुष लेते हैं। कुछ पार्टियों  ने महिला वोटरों को जागरूक करने के लिए मुहिम भी चलाई है लेकिन मुहिम रंग लाती है या नहीं यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा। महिलाओं को देश के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए जितना अपनी रसोई के प्रति होती है। उन्हें अपने अधिकार को खुद  सूझबूझ और समझदारी से राजनीतिक तर्क को  समझकर वोट देना चाहिए ना की किसी दबाव में आकर और उन्हें जिम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य निभाना चाहिए।

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