Monday, October 3, 2022
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रेडियो सुकून है!

आज बड़े दिनों बाद कार में सफर करने निकला था, वैसे तो बैठना होता रहता था लेकिन  एक अरसे बाद सफर में रेडियो सुना और सोचते-सोचते अचानक ये बात दिमाग में आने लगी कि इन 10 सालों में ना जाने क्या क्या हो गया! दिल्ली, जो पहले कभी जाम की वजह से जानी जाती थी, वो अब रिंग रोड, बाहरी रिंग रोड और अब तो अर्बन एक्सटेंशन रोड भी हासिल कर चुकी है। इसी दशक में इस शहर ने बदलती सरकार देखी, मेट्रो अब बल्लभगढ़, बहादुरगढ़ और ग्रेटर नोएडा तक पहुंच गई है, दिल्ली ने राष्ट्रमंडल खेलों को भी होस्ट करते देखा, और न जाने क्या-क्या सकारात्मक और नकारात्मक चीज़ें हुई, लेकिन अचानक ये सब दिमाग में आते हुए देख कर एक बदलाव थोड़ा अस्वीकार्य सा लगा। मैं बात रेडियो की कम होती लोकप्रियता की कर रहा हूं।

रेडियो हमारे जीवन का सच में अब वो सच बन चुका है जो शायद धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को चुनौती दे रहा है लेकिन हर बार तकनीकी विकास का हवाला देते हुए इसको दबा दिया जाता है। अब भला कौन ही सुनेगा इस स्पोटिफाई के युग में रेडियो? लेकिन सच बताऊं ये हमारी जिंदगी का एक वो हिस्सा है जिसे शायद हमसे अलग नहीं करना चाहिए!

मैं खुद भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करता हूं। 2019 से खुद का स्मार्टफोन है, पहले मम्मी का चलाया करता था। इससे पहले इमरजेंसी के लिए सैमसंग का बटन वाला फोन हुआ करता था, जिसमे सिर्फ रेडियो हुआ करता था। जब ट्यूशन जाया करता था तो फोन में रेडियो लगा लेता था और सफर भर उसको ही सुनता था। उस समय मेरी दिनचर्या का हिस्सा होती थी ये। नीलेस मिस्रा के साथ यादों का इडियट बॉक्स, नवेद का मुर्गा बनाना, रौनक का बाउवा वाला किरदार ये सब मेरे पसंद के कुछ शो हुआ करते थे। और शाम को एक बार आकाशवाणी की वो डेली न्यूज़ वो सुनना तो जरूरी था। मुझे याद है मैं बहुत बढ़-चढ़ कर क्लास में एप्रिशिएट किया जाता था कि ये रेडियो सुनता है। पर अब स्मार्टफोन के आ जाने के बाद से ही मानो ये चीज मेरी दिनचर्या से निकल चुकी है। अब तो स्पोटिफाई है, प्लेलिस्ट है और न जाने क्या क्या है। ऐप आपके पसंद के हिसाब से गाने खुद ही चला देता है और बस सुनते रहिए उसको। पहले तो हर तरह के गाने सुना करते थे। सुबह सुबह 7 बजे तक भजन, फिर फिल्मी और एल्बम के नए नए गाने, रात को 8 बजे से पुराने और 11 बजे के बाद से डीजे वाले और तो और एकदम वो गाने जो आपको आपकी यादें ताजा करने को मजबूर कर दें लेकिन अब ऐसा नहीं है। सब कुछ बिजली की रफ्तार से बदल रहा है। ना जाने कितने लोगों को इसने रोजगार दिया है, क्षेत्रीय एड का तो सबसे बड़ा प्लेटफार्म है ये! समाचार, गाने, खेल जगत सब से एक साथ रूबरू करवाता है ये रेडियो। पर अब चित्र एकदम अलग है।

मैने कही सुना था कि अगर इस दुनिया में परमाणु हमले हो जाए और मानव प्रजाति बच जाए, तो मानव के साथ केवल एक चीज ही जायेगी और वो है रेडियो। अब पता नहीं ये बात कितनी सच है। मैं गलत भी हो सकता हूं। लेकिन मुझे इतना जरूर लगता है कि रेडियो को ऐसे बूढ़ा नहीं करना चाहिए और ये रेडियो बरकरार रहना चाहिए।

अब नए इयरफोन ऑर्डर कर दिए हैं, तारों वाले ही, ताकि रेडियो सुन सकूं। मै अपनी तरफ से पहल तो कर ही सकता हूं ना?

आशा करता हूं जल्द ही आप भी शुरू करेंगे!

वाकई रेडियो सुकून है!😌💕

~हार्दिक

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