Saturday, December 3, 2022
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वर्तमान में शिक्षा का हाल

मंडेला ने कहा था कि शिक्षा वह शस्त्र है जिससे दुनिया बदली जा सकती है । परंतु आज के दौर में शिक्षा ज्ञान का नहीं बल्कि अंक प्राप्त करने तक ही सीमित रह गयी है। एक दौर था जब शिक्षा ज्ञान प्राप्त करने का एक सशक्त ज़रिया था, परंतु वर्तमान में यह अब मात्र एक प्रतियोगिता पास करने के लिए ही रह गयी है । इसका परिणाम यह हुआ है कि छात्र छात्राएँ केवल डिग्री ले रहे है और ज्ञान के मामले में पिछडज्ञान वह प्रकाश है जो अंधकार रूपी समाज को प्रकाशित करता है हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016-17 के दौरान स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सूचकांक में देश के बीस बड़े राज्यों में केरल शीर्ष स्थान पर जबकि इसके बाद राजस्थान और कर्नाटक दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे । एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्राथमिक शिक्षा शुरू से उपेक्षित ही रही है । इसकी एक वजह बच्चों पर पढ़ाई को लेकर ज़ोर और बचपन में पढ़ाई को लेकर दबाव भी है । जिस उम्र में बच्चो को पढाई के साथ-साथ खेलना- कूदना भी चाहिए वह आज उसी उम्र में पढ़ाई की बोझ तले दबते जा है ।

देश में तकरीबन अस्सी लाख ऐसे बच्चे भी है जो विभिन्न वजह से स्कूल नहीं जा पाते है। लाखों बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़ देते है । प्राथमिक शिक्षा में गिरावट आने की वजह से उच्च शिक्षा में भी गिरावट आ रही है। सच ये भी है कि जब तक प्राथमिक शिक्षा में सुधार नही लाया जाएगा ,तब तक उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आना संभव नहीं है। शिक्षा मानव जीवन का वह महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जिसके बिना मनुष्य जीवन अधूरा है।

अतः सही शिक्षा प्राप्त करना इस सदी की जरूरत है, ऐसे में अगर शिक्षा का स्तर ऐसे ही गिरता रहा तो देश और समाज का कल्याण होना असंभव हो जाएगा। *शिक्षा से हो ऐसी आस कि सबका हो सके विकास*

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